विश्व मस्तिष्क दिवस 2026: भारत में 3 करोड़ से अधिक लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से प्रभावित, विशेषज्ञों ने समय पर इलाज की दी सलाह
विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 3 करोड़ से अधिक लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से प्रभावित हैं और समय पर पहचान व उपचार से स्ट्रोक, डिमेंशिया, पार्किंसन और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है
विश्व मस्तिष्क दिवस (22 जुलाई 2026) के अवसर पर न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने लोगों से मस्तिष्क के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। इस वर्ष की थीम *"Brain Health: Access for All"* है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 3 करोड़ से अधिक लोग न्यूरोलॉजिकल विकारों से प्रभावित हैं। देश में होने वाली कुल बीमारियों के बोझ का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा मस्तिष्क संबंधी रोगों का है। बढ़ता तनाव, वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और बढ़ती उम्र के कारण स्ट्रोक, एपिलेप्सी, माइग्रेन, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट एवं स्ट्रोक विशेषज्ञ *डॉ. पवन पै* ने बताया कि स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि अचानक हाथ-पैरों में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, असामान्य या तेज सिरदर्द, चक्कर आना, याददाश्त कमजोर होना या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये मस्तिष्क की गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अल्जाइमर, डिमेंशिया, पार्किंसन, ब्रेन ट्यूमर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और नसों से जुड़ी बीमारियों की शुरुआत अक्सर हल्के लक्षणों से होती है। बार-बार सिरदर्द, भूलने की समस्या, हाथ-पैरों में झुनझुनी, चलते समय संतुलन बिगड़ना, हाथ कांपना, दौरे पड़ना या अचानक बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट *डॉ. प्रणव मेहता* ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। समय पर जांच, सही उपचार, जनजागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लाखों लोगों को गंभीर विकलांगता से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान और विशेषज्ञों द्वारा उपचार शुरू करने से अधिकांश मस्तिष्क संबंधी रोगों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे मरीज लंबे समय तक स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं
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