भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को मिलेगी नई ऊंचाई, यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं से रोजगार तक खुलेंगे नए अवसर: ब्रजेश पाठक

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। AI, डिजिटल हेल्थ, मेडिकल रिसर्च, वृद्धजन देखभाल, कौशल विकास और हेल्थकेयर रोजगार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की तैयारी है

Aug 21, 2026 - 22:42
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भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को मिलेगी नई ऊंचाई, यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं से रोजगार तक खुलेंगे नए अवसर: ब्रजेश पाठक

 उत्तर प्रदेश और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अत्याधुनिक तकनीक, कौशल विकास, अनुसंधान और वृद्धजन देखभाल को जोड़कर उत्तर प्रदेश में भविष्य के लिए एक मजबूत हेल्थकेयर मॉडल विकसित करने की तैयारी है।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित *यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि तकनीक, कौशल, नवाचार, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ जोड़कर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 81 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 45 सरकारी और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। 60 जिलों में मेडिकल कॉलेज की सुविधा उपलब्ध है, जबकि बाकी जिलों में पीपीपी मॉडल के जरिए मेडिकल कॉलेज विकसित करने की योजना है। वर्ष 2017 में प्रदेश में एमबीबीएस की 4,540 सीटें थीं, जो बढ़कर 12,800 हो गई हैं। वहीं पीजी सीटों की संख्या 1,221 से बढ़कर 4,995 हो चुकी है।

सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। एम्स गोरखपुर और एम्स रायबरेली के अलावा गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, मेरठ, कानपुर और आगरा में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया गया है।

न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही कैंसर निदान, अनुसंधान, बाल चिकित्सा और डायबिटीज जैसी सेवाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।

जापान की विशेषज्ञता से वृद्धजन देखभाल को बढ़ावा

ब्रजेश पाठक ने कहा कि जापान के वृद्धजन स्वास्थ्य और देखभाल मॉडल से उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। वृद्धजन देखभाल, डिमेंशिया केयर, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, घर आधारित देखभाल और प्रशामक देखभाल जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

यामानाशी प्रीफेक्चर के साथ स्वस्थ वृद्धावस्था, देखभाल कर्मियों के कौशल विकास, डिजिटल हेल्थ, सहायक तकनीक और संयुक्त प्रशिक्षण एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा रहा है।

 हेल्थकेयर वर्कफोर्स कॉरिडोर की तैयारी

उत्तर प्रदेश और जापान के बीच प्रस्तावित हेल्थकेयर वर्कफोर्स कॉरिडोर के जरिए प्रशिक्षण, जापानी भाषा, कौशल विकास, प्रमाणन, जापान में व्यावहारिक अनुभव और रोजगार को एक साथ जोड़ने की योजना है।

इसके अलावा चिकित्सा उपकरण निर्माण, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दूरस्थ रोगी निगरानी, पुनर्वास तकनीक और स्मार्ट हेल्थ सिस्टम जैसे क्षेत्रों में जापानी कंपनियों और संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

संयुक्त अनुसंधान और नवाचार पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों को जापान के विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और अनुसंधान संस्थानों से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।

कैंसर, मधुमेह, वृद्धजन स्वास्थ्य, पुनर्वास, डिजिटल हेल्थ, एआई, आधुनिक निदान तकनीक और चिकित्सा उपकरणों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी का अगला चरण केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य, कौशल, तकनीक, अनुसंधान और रोजगार को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को भविष्य की स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा

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