आषाढ़ी एकादशी पर मीरा-भाईंदर बना 'मिनी पंढरपुर', 51 फीट ऊंची विठ्ठल प्रतिमा के समक्ष भव्य महाआरती संपन्न
आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर मीरा-भाईंदर के नवघर तालाब परिसर में 51 फीट ऊंची भगवान विठ्ठल की प्रतिमा के समक्ष वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरा शहर विठ्ठल भक्ति में सराबोर नजर आया
देवशयनी आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मीरा-भाईंदर का नवघर तालाब परिसर शनिवार को भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन गया। यहां स्थापित 51 फीट ऊंची भगवान विठ्ठल की भव्य प्रतिमा के समक्ष हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में महाआरती का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में 'माऊली-विठ्ठल' के जयघोष, टाल-मृदंग की धुन और अभंग-कीर्तन से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
इस अवसर की सबसे बड़ी विशेषता वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती की तर्ज पर आयोजित महाआरती रही। काशी से आए विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ भगवान विठ्ठल की आरती संपन्न कराई, जिससे उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
यह आयोजन महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री तथा धाराशिव जिले के पालकमंत्री एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि प्रताप इंदिराबाई बाबुराव सरनाईक की संकल्पना के तहत आयोजित किया गया। पिछले वर्ष 51 फीट ऊंची विठ्ठल प्रतिमा के लोकार्पण के दौरान उन्होंने प्रतिवर्ष आषाढ़ी एकादशी पर यहां भव्य महाआरती आयोजित करने का संकल्प लिया था, जिसे इस वर्ष साकार किया गया।
मीरा-भाईंदर को 'मिनी इंडिया' के नाम से जाना जाता है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग सौहार्दपूर्वक निवास करते हैं। शहर में वारकरी परंपरा भी काफी समृद्ध है। ऐसे अनेक श्रद्धालु जो किसी कारणवश पंढरपुर नहीं जा पाते, उनके लिए इस भव्य विठ्ठल प्रतिमा और महाआरती का आयोजन विशेष आस्था का केंद्र बन गया।
कार्यक्रम में स्थानीय भजनी मंडलों ने अभंग, भजन और कीर्तन प्रस्तुत किए, जबकि वारकरी संप्रदाय के श्रद्धालुओं ने पारंपरिक फुगड़ी और भक्ति नृत्य के माध्यम से विठ्ठल भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वारकरी, महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिक इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।
भव्य दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और हजारों श्रद्धालुओं की सामूहिक आरती के बीच नवघर तालाब परिसर पूरी तरह पंढरपुर की अनुभूति कराता नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान विठ्ठल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की
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