सेंद्रिय और प्राकृतिक खेती मार्गदर्शन शिविर का शुभारंभ, 150 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
अस्मिता इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गेनिक एंड नेचुरल फार्मिंग (AIONF) के छह महीने के नि:शुल्क सेंद्रिय और प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर का नागपुर के रामटेक में शुभारंभ हुआ। पहले सत्र में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 150 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया
अस्मिता एजुकेशन एंड हेल्थकेयर फाउंडेशन और अस्मिता इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गेनिक एंड नेचुरल फार्मिंग (AIONF) की संयुक्त पहल से छह महीने के नि:शुल्क ‘सेंद्रिय और प्राकृतिक खेती मार्गदर्शन शिविर’ का शुभारंभ हुआ। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 150 से अधिक विद्यार्थियों ने इस प्रशिक्षण के पहले सत्र में हिस्सा लिया।
नागपुर जिले के रामटेक तालुका स्थित छतरपुर, बोरडा गांव के अस्मिता ऑर्गेनिक फार्म्स में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन महाराष्ट्र के राज्यमंत्री आशिष जयसवाल, पूर्व राज्यसभा सदस्य अविनाश पांडे और कृषि विशेषज्ञ डॉ. एम. एन. वेणुगोपाल की प्रमुख उपस्थिति में हुआ।
कार्यक्रम में रामटेक पुलिस निरीक्षक राजेशकुमार थोरात, नागपुर तालुका कृषि अधिकारी सुनील कोरटे, पूर्व नगरसेवक किशोर जिचकर और किसान नूर अली सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रयोगशील किसान एस. मुजफ्फर हुसैन के मार्गदर्शन में किया गया।
इस अवसर पर अस्मिता ऑर्गेनिक फार्म्स के Spice Garden का नाम कृषि क्षेत्र में योगदान के सम्मान में Dr. M. N. Venugopal Spice Garden रखने की घोषणा की गई। साथ ही मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग के किनारे लगभग 701 किलोमीटर लंबा Native Biodiversity Green Corridor विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
AIONF का छह महीने का यह कोर्स पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें केवल कक्षा आधारित सैद्धांतिक शिक्षा के बजाय खेत पर व्यावहारिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्रशिक्षण में मिट्टी का स्वास्थ्य और प्रबंधन, जैविक खाद, सूक्ष्मजीव आधारित कृषि इनपुट, प्राकृतिक कीट नियंत्रण, फसल नियोजन, अंतरफसल पद्धति, जल प्रबंधन, मल्चिंग, फसल कटाई के बाद का प्रबंधन, कृषि अर्थव्यवस्था, बाजार, मूल्यवर्धन और प्रमाणन प्रक्रिया जैसे विषय शामिल हैं।
विदर्भ सहित महाराष्ट्र के किसानों के सामने पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत, मिट्टी का स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कम पानी में खेती और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी प्रशिक्षण में जोर दिया जा रहा है।
राज्यमंत्री आशिष जयसवाल ने सेंद्रिय और प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों का ज्ञान देने के महत्व पर जोर दिया। वहीं अविनाश पांडे ने खेती में व्यावहारिक अनुभव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उचित मार्गदर्शन के समन्वय को आवश्यक बताया।
डॉ. एम. एन. वेणुगोपाल ने विद्यार्थियों से खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का आह्वान किया। उन्होंने मिट्टी, फसल, जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संबंध को समझने पर जोर दिया।
एस. मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि सेंद्रिय और प्राकृतिक खेती का ज्ञान केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे खेत में समझकर लागू करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पहले सत्र में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 150 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस पहल के लिए उत्साहजनक है
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