मिरा-भाईंदर में अवैध निर्माण पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का ‘नायक’ अंदाज, नगररचना विभाग पर बरसे
मिरा-भाईंदर में कथित अवैध निर्माण और नगररचना विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित मामलों की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और कथित आर्थिक अनियमितताओं की व्यापक जांच के निर्देश दिए
मिरा-भाईंदर शहर में कथित अवैध निर्माण और महानगरपालिका के नगररचना विभाग के कामकाज को लेकर गंभीर शिकायतों के बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को नगररचना विभाग का दौरा कर अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कथित नियमबाह्य निर्माण और अनुमति प्रक्रियाओं को लेकर प्रशासन के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने तथा विकासकों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की कोशिश की गई। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री सरनाईक ने संबंधित अधिकारियों से दस्तावेजों और मामलों की स्थिति की जानकारी ली।
सरनाईक ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी क्या है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
कोर्ट के स्टेटस क्वो आदेश को लेकर भी सवाल
Special Civil Suit No. 481/2014 से जुड़े मामले में 4 मार्च 2024 को न्यायालय द्वारा विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने का दावा किया गया है। शिकायत के अनुसार, महानगरपालिका इस मामले में पक्षकार होने के बावजूद संबंधित निर्माण एवं अनुमति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मौजे नवघर क्षेत्र की संबंधित जमीनों पर आपत्तियां और न्यायालयीन आदेश मौजूद होने के बावजूद कुछ निर्माण परियोजनाओं को अनुमति दी गई। मामले में जीएन कंस्ट्रक्शन, स्टोनवॉल बिल्डकॉन एलएलपी, सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों के नाम भी शिकायत में सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
150 से 250 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की जांच की मांग
शिकायत में इस पूरे मामले में करीब 150 से 250 करोड़ रुपये के कथित संदिग्ध आर्थिक व्यवहार का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग की गई है।
मंत्री प्रताप सरनाईक ने मामले से जुड़े दस्तावेज और कथित सबूतों की फाइल मिरा-भाईंदर के पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण को सौंपते हुए आर्थिक लेन-देन और कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच के निर्देश दिए।
वास्तुविद और विकासकों पर कार्रवाई की मांग
मामले में संबंधित वास्तुविद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, उनकी पेशेवर सनद रद्द करने तथा कथित नियमबाह्य निर्माण में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है। गलत जानकारी या कथित तौर पर गलत प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत किए जाने के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
अब इस मामले में पुलिस और महानगरपालिका प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और नियमों का उल्लंघन किन स्तरों पर हुआ। मामले की जांच पर मिरा-भाईंदर के नागरिकों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है
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