चेना गांव के कथित अनधिकृत निर्माण पर समीक्षा बैठक, नरेंद्र मेहता ने आयुक्त और अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

मीरा-भाईंदर के चेना गांव स्थित इको-सेंसिटिव जोन में कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर समीक्षा बैठक हुई। विधायक नरेंद्र मेहता ने आयुक्त और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की, जबकि निर्माण की अनुमति और दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए गए हैं

Sep 10, 2026 - 14:40
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चेना गांव के कथित अनधिकृत निर्माण पर समीक्षा बैठक, नरेंद्र मेहता ने आयुक्त और अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे सेना गांव के इको-सेंसिटिव जोन में हुए कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह मामला मौजे चेना स्थित सर्वे नंबर 97 और 98 के भूखंडों पर हुए निर्माण से संबंधित है। बैठक में महापौर डिंपल विनोद मेहता और विधायक नरेंद्रजी मेहता ने संबंधित महानगरपालिका अधिकारियों से मामले को लेकर जवाब मांगा।

यह बैठक शिकायतकर्ता राजेश सिंह और डॉ. सुरेश येवले द्वारा 7 सितंबर 2026 को की गई शिकायत के आधार पर आयोजित की गई। बैठक में संबंधित निर्माण की वैधता, आवश्यक नियमों के पालन, अनुमतियों तथा पर्यावरण से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कथित अनधिकृत निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और वास्तुविद के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के संबंध में आयुक्त को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नियमबाह्य निर्माण को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

दस्तावेजों और अनुमतियों की जांच के निर्देश

बैठक में निर्माण से संबंधित अनुमति, दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए। महापौर डिंपल मेहता ने कहा कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विकासक और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बैठक में महापालिका आयुक्त राधाबिनोद शर्मा, विधायक नरेंद्र मेहता, उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटील, स्थायी समिति सभापति हसमुख गेहलोत, प्रभाग समिति सभापति वर्षा भानुशाली, नगरसेवक भगवती शर्मा, संजय थरथरे और तरुण शर्मा सहित नगररचना, राजस्व, वन और विधि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रताप सरनाईक के आरोपों के बाद बढ़ा विवाद

चेना गांव के इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इससे पहले आरोप लगाया था कि आवश्यक अनुमति मिलने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था और महानगरपालिका के नगररचना विभाग के कुछ अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

इन आरोपों के बाद हुई समीक्षा बैठक में विधायक नरेंद्र मेहता ने आयुक्त और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। मेहता ने आरोप लगाया कि महानगरपालिका आयुक्त प्रताप सरनाईक के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर गलत तरीके से अनुमति दिए जाने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

शिकायतकर्ताओं ने कार्रवाई नहीं होने का लगाया आरोप

बैठक में मौजूद शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन से पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें अपनी बात रखने के लिए न्यायालय और हरित लवाद का रुख करना पड़ा, जिससे उन्हें आर्थिक खर्च भी उठाना पड़ा।

वहीं, लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब जांच में निर्माण की वैधता, अनुमतियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं

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