रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण शुरू, 15 अगस्त के बाद प्रमाणपत्र अनिवार्य
महाराष्ट्र परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के संयुक्त प्रयास से अमराठी भाषी रिक्शा, टैक्सी, ओला और उबर चालकों के लिए मराठी संवाद भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। 1 जून से 15 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के बाद RTO द्वारा प्रमाणपत्र दिया जाएगा। प्रमाणपत्र नहीं होने पर 15 अगस्त के बाद कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र राज्य परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के संयुक्त तत्वावधान में अमराठी भाषी वाहन चालकों के लिए "मराठी संवाद भाषा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम" शुरू किया गया है। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 जून से 15 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य रिक्शा, टैक्सी, ओला, उबर और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जुड़े चालकों को मराठी भाषा में संवाद करने के लिए सक्षम बनाना है। महाराष्ट्र की राजभाषा मराठी होने के कारण आम नागरिकों और यात्रियों से प्रभावी संवाद के लिए मराठी भाषा का ज्ञान आवश्यक माना गया है।
प्रशिक्षण के दौरान वाहन चालकों को दैनिक जीवन और यात्रियों से बातचीत में उपयोग होने वाले सरल और व्यवहारिक मराठी वाक्य सिखाए जाएंगे। चार घंटे के इस पाठ्यक्रम में प्रत्येक घंटे चार उपयोगी वाक्यों का अभ्यास कराया जाएगा, जिससे चालक यात्रियों के साथ आत्मविश्वास और सम्मानपूर्वक संवाद कर सकेंगे।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रत्येक वाहन चालक को आरटीओ की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार, 15 अगस्त 2026 के बाद आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहन चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आयोजकों का कहना है कि यह पहल केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र में सामाजिक समरसता, आपसी सम्मान और नागरिकों व वाहन चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मराठी भाषा का ज्ञान बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम एवं सौहार्दपूर्ण बनेगी।
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