मीरा-भाईंदर के चेना गांव के जंगल में शिकार के दौरान गोली लगने से मनपा कर्मचारी की मौत, डॉक्टर समेत 6 गिरफ्तार!
मीरा-भाईंदर के चेना गांव के जंगल में जंगली सूअर के शिकार के दौरान गोली लगने से महानगरपालिका कर्मचारी विजय सुखरू सापटे की मौत हो गई। मामले में डॉक्टर राजेश पालांडे समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मृत्यु प्रमाणपत्र में कथित तौर पर हार्ट अटैक का उल्लेख किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस घटना, हथियार के इस्तेमाल और चिकित्सकीय प्रक्रिया की जांच कर रही है।
चेना गांव के जंगल में जंगली सूअर के शिकार के दौरान गोली लगने से मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के सफाई कर्मचारी विजय सुखरू सापटे की मौत के मामले में डॉक्टर राजेश पालांडे समेत छह लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में मौत के प्रमाणपत्र में कथित तौर पर हार्ट अटैक का उल्लेख किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मृतक विजय सुखरू सापटे की उम्र 60 वर्ष थी और वह चेना गांव के वेलकरी पाड़ा इलाके के निवासी थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छह लोग जंगली सूअर के शिकार के लिए जंगल में गए थे। वे तीन-तीन लोगों के दो समूहों में बंटकर अलग-अलग दिशाओं में शिकार कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि रात करीब 12 बजे दोनों समूह एक-दूसरे के करीब पहुंचे। एक समूह के पास मौजूद बैटरी की रोशनी दूसरे समूह को दिखाई दी। अंधेरे में इस रोशनी को किसी जानवर की आंखें समझे जाने के कारण गोली चलने की बात सामने आई है। हालांकि, गोली किसने चलाई और घटना वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना में विजय सापटे की मौत हो गई, जबकि कल्पेश ढगळा और कुणाल शेलार के घायल होने की जानकारी है। घायलों को काशिमीरा स्थित आशीष अस्पताल में भर्ती कराए जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल विजय सापटे की मौत के कारण को लेकर है। दावा किया जा रहा है कि गोली लगने की घटना के बावजूद मृत्यु प्रमाणपत्र में हार्ट अटैक का उल्लेख किया गया। इसी कथित चिकित्सकीय प्रक्रिया के संबंध में डॉक्टर राजेश पालांडे की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के पीछे क्या चिकित्सकीय आधार था, कौन-सी जांच की गई और डॉक्टर पर वास्तव में क्या आरोप लगाए गए हैं, इसकी पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और पुलिस के बयान से होना जरूरी है। फिलहाल इन सवालों को जांच का विषय माना जा रहा है।
डॉक्टर राजेश पालांडे के शिवसेना के शिंदे गुट से जुड़े होने और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के करीबी होने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जाता है कि कुछ महीने पहले डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति हुई थी और नियुक्ति प्रमाणपत्र प्रताप सरनाईक के हाथों दिया गया था।
हालांकि, राजनीतिक संबंधों और इस आपराधिक मामले में कथित भूमिका को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखा जाना चाहिए। इन संबंधों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
मामले में महेश गायकर के साथ कातोड, बिस्तूर और लाभड नाम भी सामने आए हैं। डॉक्टर राजेश पालांडे समेत कुल छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। हालांकि, सभी गिरफ्तार व्यक्तियों के पूरे नाम, उनकी व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज धाराओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस जांच में अब यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि गोली किसने चलाई, इस्तेमाल किया गया हथियार किसका था, उसके लिए वैध लाइसेंस था या नहीं और घटना के बाद अस्पताल में क्या चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई गई।
महानगरपालिका कर्मचारी की मौत और मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर उठे सवालों के कारण इस मामले पर सबकी नजर है। अब पुलिस जांच और आधिकारिक मेडिकल दस्तावेजों से ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
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