छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने की साजिश?” — मनसे का प्रशासन पर बड़ा आरोप
महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मनसे ने प्रशासन पर प्रतिमा हटाने की साजिश का आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि “शिवरायों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आने वाले दिनों में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
काशीमीरा चौक स्थित छत्रपति शिवाजी Maharaj की अश्वारूढ़ प्रतिमा को लेकर एक बार फिर शहर का माहौल गरमा गया है। प्रतिमा के संभावित स्थलांतरण की चर्चा के बाद शिवप्रेमियों और विभिन्न राजनीतिक दलों में नाराज़गी बढ़ती दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने प्रशासन पर “दुरुस्ती के नाम पर प्रतिमा हटाने की साजिश” रचने का आरोप लगाते हुए तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
करीब तीन दशक से काशीमीरा चौक पर स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की यह प्रतिमा मीरा-भाईंदर शहर की पहचान मानी जाती है। लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट, फ्लायओवर और सड़क विस्तार के चलते चौक का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। प्रशासन का कहना है कि नए निर्माण कार्यों की वजह से प्रतिमा पहले की तरह स्पष्ट दिखाई नहीं देती, इसलिए उसकी दुरुस्ती और आगे की व्यवस्था को लेकर महासभा में चर्चा की गई।
जानकारी के अनुसार, प्रतिमा की मरम्मत के लिए विशेषज्ञ सलाहकार और मूर्तिकार नियुक्त करने पर विचार किया गया है। हालांकि दुरुस्ती के बाद प्रतिमा को दोबारा उसी स्थान पर लगाया जाएगा या किसी अन्य जगह स्थानांतरित किया जाएगा, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। इसी अनिश्चितता को लेकर शिवप्रेमियों में नाराज़गी बढ़ रही है।
मनसे पदाधिकारियों ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि, “छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं बल्कि महाराष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। किसी भी निर्णय से पहले शिवप्रेमियों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, अन्यथा शहर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।”
इस मुद्दे को लेकर अब शहर का राजनीतिक माहौल भी गर्माने लगा है। आने वाले दिनों में शिवप्रेमी संगठन, सामाजिक संस्थाएं और विभिन्न राजनीतिक दल आंदोलन को और तेज कर सकते हैं।
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